महाराष्ट्र में एक महिला पति के पेंशन के लिए सरकारी आफिस गयी। वहां बैठे कर्मचारी ने महिला से कहा ‘पास आओ’। यह सुनते ही महिला भड़क गयी और मामला पुलिस के पास पहुंचा। अब बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पुरुष द्वारा किसी महिला से सिर्फ यह कहना कि ‘पास आओ’ ‘गंदा इरादा’ या ‘यौन इरादा’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने 59 साल के रिटायर्ड क्लर्क के खिलाफ दर्ज केस पूरी तरह खारिज कर दिया। यह मामला अमरावती जिले के गाडगे नगर पुलिस स्टेशन का है।
साल 2023 का है। जब एक विधवा महिला अपने मृत पति के पेंशन और मेडिकल बिल का काम कराने गई थी। क्लर्क ने समझाते हुए उससे ‘पास आओ’ कहा था। महिला ने इसे अपमानजनक बताया और आरोपी के खिलाफ धारा 354 तथा धारा 509 के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
साल 2025 में चार्जशीट भी दाखिल हो गई। 59 साल के आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के ने याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा, ‘केवल आरोप यह है कि आरोपी ने महिला से पास आने को कहा। ये शब्द बिल समझाने के संदर्भ में बोले गए थे। इसमें कोई यौन इरादा नहीं ठहराया जा सकता।’ जज ने बताया कि धारा 354 के लिए अटैक या बल का इस्तेमाल जरूरी है, जो इस मामले में नहीं था। धारा 509 के लिए भी महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाने का साफ इरादा होना चाहिए, जो यहां नहीं है।
कोर्ट ने एफआईआर, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट देखकर फैसला दिया कि इन आरोपों से कोई अपराध नहीं बनता है और साफ किया कि सरकारी काम के दौरान बोले गए शब्दों को गलत मतलब नहीं लगाया जा सकता है। पहले भी ऐसे मामले बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसे ही फैसले दिए हैं। इसलिए यह मामला भी नहीं बनता है। कोर्ट ने ममला बंद कर दिया है। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की बात है।
पहले भी ऐसे मामले आए हैं
साल 2025 में एक मामले में कोर्ट ने कहा कि किसी लड़की से सिर्फ ‘आई लव यू’ कहना अकेले में यौन इरादा नहीं माना जा सकता। ये फैसले दिखाते हैं कि कोर्ट महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लेता है, लेकिन कानून का दुरुपयोग भी नहीं होने देता। छोटी-मोटी बातों पर केस दर्ज होने से निर्दोष लोग परेशान होते हैं।
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